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1 सितंबर से डीमैट और म्यूचुअल फंड के नियम बदलेंगे, नॉमिनी अपडेट नहीं किया तो बढ़ सकती है परेशानी

📅 09 अगस्त 2026

नई दिल्ली, 9 अगस्त। शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों के लिए सितंबर से एक अहम बदलाव लागू होने जा रहा है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) की ओर से सिंगल-होल्डर डीमैट अकाउंट और म्यूचुअल फंड फोलियो में नॉमिनेशन से जुड़े नियमों में बदलाव किया गया है। नए नियम 1 सितंबर 2026 से प्रभावी होंगे।

इस बदलाव का उद्देश्य निवेशकों के लिए नॉमिनेशन की प्रक्रिया को आसान बनाना और किसी निवेशक की मृत्यु की स्थिति में उसकी संपत्ति के हस्तांतरण से जुड़ी परेशानियों को कम करना है। ऐसे में अगर आपके नाम पर अकेले डीमैट अकाउंट या म्यूचुअल फंड फोलियो है, तो नए नियम को समझना जरूरी है।

1 सितंबर से क्या बदलेगा नियम?

नए प्रावधान के तहत सिंगल-होल्डर डीमैट अकाउंट और म्यूचुअल फंड फोलियो में नॉमिनेशन का विकल्प खाली नहीं छोड़ा जा सकेगा। निवेशक को या तो नॉमिनी की जानकारी देनी होगी या फिर आधिकारिक घोषणा के जरिए यह बताना होगा कि वह किसी को नॉमिनी नहीं बनाना चाहता।

इसका मतलब यह नहीं है कि हर निवेशक के लिए नॉमिनी बनाना अनिवार्य होगा। जो व्यक्ति नॉमिनी नहीं रखना चाहता, उसके लिए ऑप्ट-आउट का विकल्प उपलब्ध रहेगा।

जॉइंट अकाउंट वालों पर क्या होगा असर?

यदि डीमैट अकाउंट या म्यूचुअल फंड फोलियो संयुक्त यानी जॉइंट होल्डिंग में है, तो नॉमिनेशन का विकल्प पहले की तरह वैकल्पिक रहेगा।

ऐसे अकाउंट में नॉमिनी जोड़ने या उसमें बदलाव करने के लिए सभी संबंधित खाताधारकों की सहमति जरूरी होगी। इसलिए जॉइंट अकाउंट रखने वाले निवेशकों के लिए सिंगल-होल्डर अकाउंट की तरह अनिवार्य बदलाव लागू नहीं होगा।

नॉमिनी नहीं बनाना चाहते तो क्या करें?

अगर कोई निवेशक अपनी संपत्ति के लिए नॉमिनी नियुक्त नहीं करना चाहता, तो उसे नॉमिनी की जगह ऑप्ट-आउट डिक्लेरेशन देना होगा।

इसके लिए निवेशक अपने ब्रोकर, बैंक या म्यूचुअल फंड प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध नॉमिनेशन सेक्शन में जाकर निर्धारित प्रक्रिया के तहत घोषणा जमा कर सकता है। वहीं, नॉमिनी नियुक्त करने वाले निवेशक अधिकतम तीन लोगों को नॉमिनी बना सकते हैं और उनके बीच अपनी संपत्ति का प्रतिशत भी तय कर सकते हैं।

नॉमिनी नहीं होने पर निवेश का पैसा किसे मिलेगा?

नॉमिनी दर्ज नहीं होने की स्थिति में निवेशक की मृत्यु के बाद उसकी संपत्ति खत्म नहीं हो जाती। ऐसी स्थिति में संबंधित निवेश और अन्य होल्डिंग्स को निर्धारित सिक्योरिटीज ट्रांसमिशन प्रक्रिया के जरिए कानूनी उत्तराधिकारियों को हस्तांतरित किया जाता है।

हालांकि, नॉमिनी की जानकारी उपलब्ध होने से इस प्रक्रिया को आसान बनाने में मदद मिल सकती है। नॉमिनी नहीं होने पर कानूनी उत्तराधिकारियों को अपने दावे के समर्थन में जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत करने पड़ सकते हैं।

छोटे दावों के लिए आसान ट्रांसमिशन प्रक्रिया

निवेशकों और उनके कानूनी उत्तराधिकारियों की सुविधा के लिए छोटे दावों के निपटारे की प्रक्रिया को भी आसान बनाने का प्रावधान किया गया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, फिजिकल होल्डिंग में 10,000 रुपये तक और डीमैट होल्डिंग में 30,000 रुपये तक के छोटे दावों को सरल दस्तावेजी प्रक्रिया के जरिए निपटाने की सुविधा दी गई है।

इसका उद्देश्य छोटी राशि वाले मामलों में लंबी और जटिल कागजी प्रक्रिया को कम करना है, ताकि पात्र उत्तराधिकारियों को निवेश ट्रांसफर कराने में अपेक्षाकृत कम परेशानी हो।

निवेशकों को क्या करना चाहिए?

अगर आपके नाम पर सिंगल-होल्डर डीमैट अकाउंट या म्यूचुअल फंड फोलियो है, तो 1 सितंबर से पहले अपने नॉमिनेशन स्टेटस की जांच कर लेना बेहतर होगा। अगर आप नॉमिनी रखना चाहते हैं तो उसकी जानकारी अपडेट करें। वहीं, नॉमिनी नहीं रखना चाहते हैं तो संबंधित प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध ऑप्ट-आउट प्रक्रिया पूरी करें।

समय रहते नॉमिनेशन से जुड़ी जानकारी अपडेट रखने से भविष्य में निवेश के ट्रांसफर की प्रक्रिया को आसान बनाने में मदद मिल सकती है। खास तौर पर परिवार के सदस्यों और निवेश से जुड़े दस्तावेजों को व्यवस्थित रखना भी जरूरी है।

महत्वपूर्ण: यह खबर निवेश संबंधी नियमों की जानकारी पर आधारित है। किसी व्यक्तिगत निवेश निर्णय से पहले अपने ब्रोकर, म्यूचुअल फंड प्लेटफॉर्म या अधिकृत वित्तीय सलाहकार से मौजूदा नियमों की पुष्टि करें।

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